चैतीना कुआं से कोटगेट के बीच प्रतीक रूप् में भादानी और देराश्री जाति के बीच गणगौरों की दौड़ हुई। जस्सूसर गेट के मोहता कुआं, नया कुआं, चैतीना कुआं, गंगाशहर,भीनासर सहित विभिन्न स्थानों पर पारम्परिक विदाई गीत गाते हुए, डीजे व ढोल के साथ नृृत्य करते हुए गणगौर पूजन सामग्री का विसर्जन किया। मेला स्थलों पर लगी खान पान की वस्तुओं, झूलों का महिलाओं व बालिकाओं ने खूब आनंद लिया। सर्वाधिक भीड़ जस्सूसर गेट के अंदर रही।

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