बीकानेर
चैत्र कृष्ण पक्ष में सप्तमी व अष्टमी को मनाए जाने वाला लोक पर्व शीतला अष्टमी आज हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शहर में महिलाएं तड़के उठकर सीली शीतला ओ माय, सरवर पूजती घर आए… जैसे गीत गाती हुई शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाने मंदिरों में पहुंची। महिलाओं ने पुए-पकोड़ी, पूड़ी, पापड़ी, हलुआ, राबड़ी, मक्का की घाट, मोहनथाल, गुंजिया, पेठे, सकरपारे आदि व्यंजनों का भोग लगाया। इसके बाद महिलाओं ने पत्थवारी पूजी। तड़के से ही शीतला माता के मंदिरों में महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कई जगहों पर तो महिलाओं को पूजा के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। शीतला माता के ठंडे पकवानों का भोग लगाने के बाद घरों में सभी लोगों ने परंपरा के अनुसार ठंडा भोजन किया। मान्यता के अनुसार, ऋतु परिवर्तन के समय शीतला माता का व्रत और पूजन करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि शीतला माता का सप्तमी एवं अष्टमी को पूजन करने से दाह ज्वर, पीत ज्वर, दुर्गंधयुक्त फोड़े, नेत्र रोग तथा ऋतु परिवर्तन से होने वाले रोग नहीं होते।